लगता था तुम आओगे

 


इश्क़ के धागे में बँधकर  
दिल के हाथों बेबस होकर
खामोश निगाहों से मुझको
अपना हाल सुनाओगे....
फिर पहचानोगे दर्द मेरा  
और सूखे होंठों के लम्स को अपनी
ऊँगली की पोरों में भरकर
अपने लब से लगाओगे.... 
लगता था तुम आओगे


शरद 

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